शनिवार, 9 जुलाई 2011

आज का चिंतन - दुःख और सुख

आप दुखी इस लिये होते हैं क्योंकि स्तिथियों को अपने अनुकूल निर्धारित करना चाहते हैं. स्तिथियों को अपने हाल पर छोड़ दीजिए और तटस्थ द्रष्टा बनकर देखिये. अपने भीतर असीम सुख का अनुभव करेंगे.

3 टिप्‍पणियां:

  1. यह मेरा आजमाया हुआ नुस्खा है और बहुत असरदार भी :)

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  2. द्रष्टा भाव, साक्षी भाव होना बहुत बड़ी बात है, इसके लिए साधना की अनिवार्यता है.

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