गुरुवार, 26 जुलाई 2012

आज का चिंतन

अक्सर मैं ऐसे बच्चे जो मुझे अपना साथ दे सकते हैं, के साथ हंसी-मजाक करता हूँ. जब तक एक इंसान अपने अन्दर के बच्चे को बचाए रख सकता है तभी तक जीवन उस अंधकारमयी छाया से दूर रह सकता है जो इंसान के माथे पर चिंता की रेखाएं छोड़ जाती है.
.......वल्लभभाई पटेल

4 टिप्‍पणियां:


  1. इस ख़ूबसूरत पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.

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  2. मुझे यह बात बहुत सच्ची लगी। जब मैं बच्चों के साथ हँसता-खेलता हूँ, तब मैं भी खुद को हल्का और खुश महसूस करता हूँ। इंसान अगर अपने अंदर के बच्चे को जिंदा रखे, तो वह जीवन की कई परेशानियों को आसानी से संभाल लेता है।

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